हमारे बारे में
हमारे बारे में: एक दैवीय संकल्प और सेवा की विरासत
हमारी गौशाला हरियाणा के पावन गोठड़ा गाँव में स्थित है। इस गाँव का इतिहास सदियों पुराना है; प्राचीन
काल में इसे 'गौथड़ा' के नाम से जाना जाता था, जिसका शाब्दिक अर्थ ही 'गौ-रक्षा की भूमि' है। यह केवल एक
स्थान नहीं, बल्कि गौ-भक्ति का एक जीवंत प्रमाण है।
इस पावन धरा पर परम पूज्य संत श्री रघुवर दास जी महाराज की दिव्य उपस्थिति आज भी महसूस की जाती है। वे
एक ऐसे सिद्ध संत थे जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन गौ-सेवा और जीव-कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।
लोक-मान्यता और भक्तों का अटूट विश्वास है कि महाराज जी आज भी अपनी समाधिस्थ अवस्था में सूक्ष्म रूप से
गौ-वंश का उपचार और मार्गदर्शन करते हैं। उनकी इसी आध्यात्मिक ऊर्जा से प्रेरित होकर इस गौशाला की नींव
रखी गई है।
हमारा उद्देश्य: सेवा परमो धर्म:
भारतीय दर्शन में गौ माता को 'विश्वस्य मातरः' (विश्व की माता) माना गया है। जहाँ अन्य स्थानों पर दूध देने वाली गायों की सेवा होती है, वहीं श्री रघुवर दास विकलांग गौशाला का मुख्य उद्देश्य उन निराश्रित गौ-माताओं की सेवा करना है जो:
- विकलांग हैं: जिन्हें चलने-फिरने में कठिनाई है।
- घायल हैं: जो दुर्घटनाओं का शिकार हुई हैं।
- बीमार हैं: जिन्हें विशेष चिकित्सा और देखभाल की आवश्यकता है।
हमारा मानना है कि गौ-सेवा केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना है। जब एक घायल गौ-माता स्वस्थ होती है, तो वह केवल एक जीव की रक्षा नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा होती है।